नमस्कार, राजधानी में पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने फूल स्वीकार नहीं किए, लेकिन बत्ती पर मिली महिला को मायूस भी नहीं किया। अलवर वाले पूर्व मंत्री जी ने लाल डायरी का किस्सा छेड़कर एक और पूर्व मंत्री जी की याद ताजा कर दी। बीकानेर में विकास अधिकारी का ‘विकास’ देख एसीबी वाले हैरान रह गए और झालावाड़ में बंद आंखों वाला स्टंट भारी पड़ गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. आंखों पर पट्टी बांधकर ‘करतब’ आंखें बंद करके कोई हुनर नहीं दिखाना चाहिए। भारी पड़ सकता है। यह बात राजनीति पर भी लागू होती है। कई नेतागण आंख बंद करके भरोसा करने का हुनर दिखा देते हैं, बाद में उनकी आंखें खुलती हैं। निकाय चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कई मामले सामने आए। कई मामलों में तो निर्दलीयों ने नैया पार लगाई। निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव में भी कई करतब देखने को मिलेंगे। फिलहाल बात झालावाड़ की है। यहां अनंत चतुर्दशी पर शोभायात्रा निकाली जा रही थी। शोभायात्रा देखने बाजार में भीड़ थी। लोग छतों पर चढ़े थे। शोभायात्रा में पंजाब से आए गतका कलाकारों का जत्था भी था। ये लोग हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। भीड़ देखकर हर कलाकार का मनोबल बढ़ता है। कलाकारों का भी बढ़ा। स्टंट तीखे और दहलाने वाले थे। एक कलाकार ने आंखों पर पट्टी बांधी थी। दो लड़के सड़क पर लेटे हुए थे। हाथ-पैर चारों दिशाओं में फैले हुए थे। आंखों पर पट्टी बांधे कलाकार के हाथ में हथौड़ा था। वह लेटे हुए युवकों के चारों तरफ रखे छोटे कुल्हड़ों को फोड़ रहा था। जनता जनार्दन में यह डर था कि कहीं हथौड़ा लेटे हुए युवकों के अंगों को कुल्हड़ न समझ बैठे। खतरनाक स्टंट देख सभी के रोंगटे खड़े हो रहे थे। इस बीच एक कलाकार ने लेटे युवक के सिरहाने पेट्रोल से भरी मटकी पर आग लगा दी। मटकी जलने लगी। रोमांच को थोड़ा और बढ़ाने के लिए कलाकार ने बोतल से पेट्रोल मटकी की तरफ उछाला। आग तेजी से फैली। लेटा हुआ युवक और हथौड़ा चला रहा कलाकर झुलस गए। बाकी बचाने वाले और दो लोग चपेट में आ गए। करतब कोलाहल में बदल गया। 2. ‘लक्ष्मी’ के स्वामी निकले BDO नारायण उनका नाम नारायण है। ऐसे में ‘लक्ष्मी’ का स्वामी होना बनता है। लेकिन एसीबी कहती है कि आप जिस लक्ष्मी के स्वामी हो, उसका हिसाब-किताब दे दो… कि यह कहां से आई, कैसे कमाई? किस भांति अर्जित की। सवाल पर नारायण जी ने मौन व्रत रख लिया। पहले बोले कि लक्ष्मी का स्वामी उनका दोस्त है। लेकिन जब टीम घर पहुंची तो वहां से स्वर्णाभूषण किलो की मात्रा में निकलने लगे। अगर नारायण जी नगर सेठ होते, धन्नालाल होते, पुश्तैनी व्यापारी होते या फिर नए-नए एंटरप्रेन्योर होते जिसका काम चमक पड़ा हो, तो शक की कोई गुंजाइश नहीं थी। लेकिन वे बीकानेर की लोहावट तहसील के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) हैं। साधारण सैलरी वाला कर्मचारी। पहले तो कार से 8 लाख निकले। रकम को लेकर सवाल-जवाब किया तो अभिनेता मनोज कुमार की स्टाइल में बैठ गए। फिर उदासी ओढ़कर बोले- दोस्त के हैं, मेरे नहीं हैं। एसीबी ने घर पर रेड मारी तो अलमारी से डेढ़ करोड़ का सोना निकल आया। दो महंगे प्लॉट के दस्तावेज निकल आए। यकीनन ये तो दोस्त के नहीं हो सकते। आज के युग में ऐसा कौन दोस्त होगा, जो ‘लक्ष्मी’ को नारायण के घर में छोड़ दे। यूं भी ईमानदारी से नौकरी करने वाला सदा भोला-भंडारी ही रह जाता है। हैसियत से ज्यादा लक्ष्मी किसी-किसी को धन्य करती है। फिलहाल अब नारायण जी को हिसाब-किताब पूरा देना पड़ेगा। गलत तरीके से कमाई की होगी तो सींखचों के पीछे भी जाना पड़ सकता है। 3. फिर ‘लाल डायरी’ का जिक्र वे भी क्या खूबसूरत दिन थे, जब लाल डायरी का जिक्र होने पर अमिताभ बच्चन की ‘डॉन’ याद आती थी। लेकिन फिर समय बदला। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने लाल डायरी को नए सिरे से मशहूर किया। वे जान पर खेलकर किसी के घर में घुसे थे और डायरी निकाल लाए थे। इसके बाद उन्होंने पसीने में झाब-झूब होकर कहा था कि मुझे मारा-पीटा गया। लेकिन मैं ये डायरी निकाल लाया। यह खुल गई तो राजनीति में भूचाल आ जाएगा। डायरी खुली या नहीं खुली या पलट कर रख दी गई या फिर जला-मिटा दी गई, कुछ पता नहीं। लेकिन जैसी हवा बनाई जा रही थी, वैसा कुछ नहीं हुआ। एक बार एक प्रोग्राम में पूर्व मुख्यमंत्री और राजेंद्र गुढ़ा मिले। दोनों की मुलाकात हुई तो पूर्व सीएम बोले- ओ हो, गुढ़ा जी आए हैं लाल डायरी वाले। इस तरह लाल डायरी और राजेंद्र गुढ़ा का वही संबंध हो गया, जो संजीवनी बूटी और हनुमान जी का, बुलेट बाइक और कबीर सिंह का, सैट मैक्स और सूर्यवंशम का रहा है। लेकिन जिस प्रकार क्रिकेट टीम में सीनियर खिलाड़ी के टखने की चोट के बाद युवा खिलाड़ी का डेब्यू होता है, उसी प्रकार लाल डायरी का जिम्मा अब अलवर के सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्रीजी ने उठा लिया है। उन्होंने निकाय चुनाव खत्म होने के बाद अपने कार्यकर्ताओं को आदेश देते हुए कहा- इन अफसरों का नाम लाल डायरी में नोट कर लो, जो फलां पार्टी के कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे थे। फिर डेढ़ साल बाद अपनी सरकार आने वाली है। इनका हिसाब-किताब तभी करेंगे। हालांकि उनके इस बयान से अफसरों में कोई भभ्भड़ नहीं मचा है। उन्हें पता है कि लाल डायरी का हश्र आखिरकार क्या हुआ है। 4. चलते-चलते.. ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ अच्छा स्लोगन था। लेकिन स्लोगनों से राजनीति नहीं चलती। सादगी और सरलता का कोई तोड़ नहीं। पूर्व सीएम अशोक गहलोत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। इसे गहलोत के साथ चलने वाली टीम ने ही शूट किया। राजधानी में कार से गुजरते हुए एक बत्ती पर गुलाब का फूल लिए एक महिला गहलोत जी की खिड़की के पास आकर रुकी। महिला का नाम बरमा। पूर्व सीएम बरमा से बात करने लगे। नाम पूछा। फूलों के बारे में बात की। बरमा ने बताया कि वह 100 रुपए के चार गुलाब बेचती है। बरमा ने गुलाब के फूल पूर्व सीएम को भेंट करने चाहे। लेकिन उन्होंने भेंट लेने से मना कर दिया। सिर पर हाथ रख आशीर्वाद दिया। बोले- बस मैंने इन्हें ले लिया और अब तुम रखो। बरमा को याद आया कि वह पूर्व सीएम के साथ सेल्फी लेना भूल गई। वह जाते-जाते दोबारा लौटी और बोली- सर आपके साथ एक सेल्फी ले लूं। कहते हुए उसने अपना फोन पूर्व सीएम को थमा दिया। इसके बाद उनकी टीम का एक सदस्य कार से उतरा, उसने महिला के मोबाइल से फोटो खींची और महिला को फोन थमा दिया। महिला ने थैंक्यू कहा तो गहलोत हंस पड़े। इनपुट सहयोग- बल बहादुर सिंह हाड़ा (झालावाड़), अनुराग हर्ष (बीकानेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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