रोडवेज ड्राइवर का IO पर ₹5 हजार लेने का आरोप:रेवाड़ी में दूसरी पार्टी को भी दिलाए ₹2,400; हवालात में बंद करने की धमकी

रेवाड़ी जिले के थाना रोहड़ाई के जांच अधिकारी (IO) पर एक हरियाणा रोडवेज ड्राइवर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव मोहद्दीनपुर निवासी रोडवेज ड्राइवर निरंजन लाल ने एसपी को शिकायत देकर आरोप लगाया कि जमीन विवाद की जांच के दौरान उसे बार-बार थाने बुलाया गया और बाद में बिना उचित जांच के हवालात में बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान उसका मोबाइल भी ले लिया गया और सरकारी नौकरी खराब करने का डर दिखाकर उससे 5 हजार रुपए लिए गए, जबकि दूसरी पार्टी को भी उससे ₹2,400 दिलवाए गए। रोडवेज कर्मचारी को बनाया पार्टी निरंजन लाल ने बताया जिस जमीन को लेकर थाने में मामला गया है वह विवादित जमीन उसके बेटे के नाम है और उसका अपना कोई हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद उसे मामले में दूसरी पार्टी बनाकर शामिल किया गया। उसने बताया कि IO ने उसे करीब चार बार थाने बुलाया। दो बार IO स्वयं नहीं मिले, जबकि दो बार शिकायतकर्ता पक्ष थाने नहीं पहुंचा। इसके बाद भी उसे हवालात में रखने की कार्रवाई की गई। शिकायतकर्ता ने एसपी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और हवालात में रखने, मोबाइल कब्जे में लेने, धमकी देने, रुपये लेने तथा जबरन हस्ताक्षर कराने के आरोपों की जांच की मांग की है। साथ ही उसने संबंधित IO के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। नौकरी का डर दिखाने का आरोप शिकायतकर्ता निरंजन लाल का आरोप है कि हवालात में रखने के दौरान IO ने उसकी सरकारी नौकरी का डर दिखाया। आरोप है कि उसे धमकाया गया कि रुपए नहीं देने पर ऐसी धाराएं लगाई जाएगी, जिससे उसकी नौकरी खराब हो जाएगी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, नौकरी बचाने के डर से उसने 5 रुपए हजारबदेने के अलावा उससे दूसरी पार्टी को भी 2,400 रुपए दिलवाए गए। उसका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के दबाव और अपनी नौकरी को लेकर चिंता के कारण उसने विरोध नहीं किया। चार बार बुलाया, दो बार IO नहीं मिले शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन विवाद की जांच के सिलसिले में उसे करीब चार बार थाने बुलाया गया। इनमें दो बार IO रजनीश स्वयं नहीं मिले, जबकि दो बार शिकायतकर्ता पक्ष थाने नहीं आया। इसके बाद भी उसे हवालात में बंद करने और मोबाइल कब्जे में लेने का आरोप लगाया गया है। जबरन हस्ताक्षर कराने की भी शिकायत निरंजन लाल का आरोप है कि रुपए देने के बाद भी उसे उच्च अधिकारियों से शिकायत नहीं करने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे झूठे केस में फंसाकर सरकारी नौकरी खराब करने की बात कही गई। इसके बाद पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर उससे कुछ कागजात पर जबरन हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगाया है।

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