हरियाणा के करनाल में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने नगर निगम के क्लर्क को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। क्लर्क गौरव ने प्रॉपर्टी ID में नाम ठीक करने के लिए 5 हजार रुपए की डिमांड की थी। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना एसीबी को दी। टीम ने ट्रैप बिछाकर शिकायकर्ता को पैसे देकर क्लर्क के पास भेज दिया। मंगलवार सुबह जैसे ही क्लर्क को रुपए दिए, टीम ने उसे तुरंत दबोच लिया। उसके हाथों पर पाउडर भी लगा मिला है। इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि आरोपी को पहले नगर निगम ऑफिस ले जाया गया। यहां से उसे एसीबी कार्यालय लाए। अभी पूरे मामले की जांच की जा रही है। सिलसिलेवार जानिए रिश्वत का पूरा घटनाक्रम… प्रॉपर्टी आईडी में गलती, रिश्वत मांगी: करनाल निवासी कुलदीप अपनी प्रॉपर्टी आईडी में हुई गलती ठीक कराने के लिए नगर निगम पहुंचे थे। आरोप है कि क्लर्क गौरव राणा ने काम ठीक करने के बदले उससे 5 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। इसके बाद कुलदीप ने मामले की शिकायत एसीबी को कर दी। कैमिकल लगे नोट थमाए, जाल बिछाया: शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। टीम ने रिश्वत के लिए दिए जाने वाले नोटों पर कैमिकल पाउडर लगाया और उनके नंबर नोट किए। इसके बाद कुलदीप को वही नोट देकर आरोपी के पास भेजा गया। पुराने बस स्टैंड पर दबोचा क्लर्क: गौरव राणा ने कुलदीप को रुपए देने के लिए करनाल के पुराने बस स्टैंड पर बुलाया था। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे कुलदीप वहां पहुंचा और गौरव को 5 हजार रुपए दिए। रुपए लेते ही एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। नगर निगम से एसीबी कार्यालय: कार्रवाई के बाद एसीबी टीम आरोपी को पहले नगर निगम कार्यालय लेकर गई। इसके बाद उसे एसीबी कार्यालय ले जाया गया। इंस्पेक्टर अरविंद कुमार के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के बाद टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है। ACB के डर से बस स्टैंड बुलाया शिकायतकर्ता आरोपी क्लर्क ने पूरा प्लान बनाकर शिकायतकर्ता कुलदीप को बस स्टैंड पर रिश्वत के पैसे देने के लिए बुलाया था। नगर निगम के ऑफिस में उसे एसीबी की रेड का डर था। वहां कई जगह कैमरे भी लगे हुए हैं, इसीलिए उसने बस स्टैंड को सेफ जगह मानकर कुलदीप से यहीं मिलने की योजना बनाई। जांच में यह भी सामने आया है कि कुलदीप करीब एक सप्ताह से नाम ठीक कराने के लिए नगर निगम के ऑफिस आ रहा था। कल उसकी मुलाकात क्लर्क गौरव से हुई, गौरव ने इसी उससे रिश्वत मांग ली।
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