नमस्कार, कोटा की मेयर ने बैकुंठ धाम के आगे सिर क्या झुकाया, राजनीति में भूचाल आ गया। सवाई माधोपुर की SP मैडम ने सिलबट्टे पर धनिये की चटनी बनाई। दौसा के बांदीकुई में सभापति के पति खुद को ‘चेयरपति’ मानकर चल रहे हैं और जयपुर में थाने के सामने हनुमान चालीसा हो गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. चौखट पर झुकीं मेयर की ‘सफाई’ कृपा निधान के द्वार पर कृपा पात्र का झुकना कोई अचंभे की बात नहीं। कोटा की मेयर बनने के बाद अनुसुईया जी लोकसभा अध्यक्ष महोदय के घर के सामने से गुजरीं। काफिला रुका। मैडम घर के सामने पहुंचीं और दहलीज पर माथा टिका दिया। हाथ जोड़े। शहर के मेयर का नेताजी की दहलीज पर झुकना विरोधियों को नागवार गुजरा। इसके बाद लगातार तीर पर तीर बरसाए जा रहे हैं। चीफ साहब ने एक्स पर ‘फैक्स’ कर डाला। लिखा- ऐसी तस्वीर जनादेश और लोकतंत्र को लज्जित करती है। मेयर की जवाबदेही जनता के लिए होनी चाहिए। बात उनकी सही है, लेकिन लागू किसी राजनेता पर नहीं होती। राजनीति में झुक-झुककर ही नेतागण ऊंचे पायदान पर पहुंचते हैं। चीफ साहब भी पूर्व मुखियाजी के पैरों में झुकते थे। अब वक्त बदल गया है। भगत सिंह सेना के प्रमुख और हाड़ौती में राजनीतिक जमीन तलाश रहे युवा नेता नरेश मीणा ने तीर चलाने में मर्यादा को भी तार-तार कर दिया। बोले- अनुसुईया खूबसूरत महिला हैं, इसलिए मेयर बना दिया। जब चारों ओर से उमड़-घुमड़ होने लगी तो मेयर ने सफाई भी दी। कहा- बिड़ला जी की चौखट के ऊपर शिव-पार्वती की मूर्तियां हैं। उन्हें देखकर नमन किया था। अब नमन कर लिया तो कर लिया। कोई लाख तुनके। क्या फर्क पड़ता है। लेकिन सफाई देने से मामला थमता नहीं। क्या पूरे शहर में शिव-पार्वती की मूर्तियां नेताजी के द्वार पर ही मिलीं? 2. SP मैडम ने दिया चटनी का ‘डेमो’ एक पुलिसवाला रात दिन नकारात्मक माहौल में रहता है। लोग उसके पास बुरी खबर लेकर ही पहुंचते हैं। घर में फसाद हो गया। मारकाट मच गई। हत्या हो गई। एक्सीडेंट हो गया। मानहानि कर दी। पार्षद चुरा लिए। मूर्ति ले गए। मार दिया। पीट दिया। कूट दिया। आदि-आदि। रात-दिन इसी तरह की घटनाओं से जूझने वाले पुलिसकर्मी की भाषा और व्यवहार पर कभी-कभी नकारात्मकता का असर हो जाता है। पुलिस पर धड़ल्ले से आरोप लगा दिया जाते हैं। रिश्वतखोर है। नेताओं की जेब में रहती है। आमजन में विश्वास नहीं। अपराधियों में भय नहीं। पुलिसवाले किस तनाव में जीते हैं यह या तो पुलिसवाला जानता है या फिर उसका परिवार। कभी-कभी कोई अधिकारी भी ऐसे आते हैं जो आम पुलिसवाले के दर्द को समझते हैं। वे नहीं चाहते कि छुट्टी की एप्लीकेशन को हवा में उड़ा दें। अधीनस्थों से दूरी बनाकर चलें। उन्हें देखते ही मताहत सीधा तनकर सैल्यूट मारे। सवाई माधोपुर में तैनात SP ज्येष्ठा मैत्रेयी हृदय से ज्येष्ठ और व्यवहार से मैत्री का सम्मान करने वाली महिला हैं। उन्होंने पुलिसवालों के लिए कई नवाचार किए हैं। जैसे जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर जवान को अनिवार्य छुट्टी देना। वे लगातार कोशिश करती हैं कि जवान काम भली तरह करें, लेकिन तनावमुक्त भी रहें। हाल ही वन विभाग के रेस्ट हाउस में उन्होंने पुलिसवालों के लिए गेट-टुगेदर प्रोग्राम रखा। सभी साथी अधिकारी और पुलिसकर्मी मित्रों की तरह मिले। कई तरह खेल खेले। रसोई की कमान खुद एसपी ने संभाली। सिलबट्टे पर धनिया मिर्च की चटनी बनाई। साथी अधिकारी मोबाइल टॉर्च से रोशनी की। इस दौरान हंसी मजाक चलता रहा। एसपी बोलीं- सिलबट्टा काफी ऊंचा रखा है, दांव नहीं लग रहा। क्राइम ब्रांच इंचार्ज ने सलाह दी- मैडम ऊंचाई पर बैठ जाओ। मैडम ने वैसा ही किया। फिर आत्मविश्वास से कहा-लो अब देख लो चटनियां बनेंगी। चटनी बनाने में मैडम की सांस फूलने लगी। बोलीं- भैया मेरे में तो दम ही नहीं है। इस पर एएसपी दूसरी साथी महिला जवानों से बोले- तुम में से कोई कर लेतीं, मैडम को लगा दिया। एसपी मैडम ने थोड़ा दम लिया, फिर कहा- मुझे लगता था कि ये काम आसान है। इस पर सब हंस पड़े। कुल मिलाकर धनिया-मिर्च की चटनी बनाना मुश्किल हो सकता है। लेकिन आसान चटनी बनाना हर पुलिसवाला जानता है। यह डंडे से बनती है। 3. सभापति के पति ही ‘चेयरपति’ पंचायत सीरीज में एक किस्सा है। गांव की असल प्रधान रसोईघर में खटती है। वह अनपढ़ है। प्रधान का तमगा उनके पति लेकर घूमते हैं, वही सारा काम संभावते हैं। सचिव जी की प्रेरणा से प्रधान घर से निकलती हैं और पंचायत का काम-काज संभालती हैं। SDM मैडम प्रधानपति को याद दिलाती हैं कि कुर्सी उनकी नहीं, उनकी पत्नी की है। आज के दौर में ऐसे किस्से आम हैं। महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिलाओं को मुखौटा बनाकर मैदान में उतार दिया जाता है। फिर पुरुष चेयरमैन और पार्षद बनकर घूमते हैं। सारा कामकाज हाथ में ले लेते हैं। दौसा के बांदीकुई में विनोद देवी चुनावी मैदान में उतरीं। सभापति का चुनाव था। उनके पति रतन पटेल राजनीति का मुख्य चेहरा। इसलिए सभी पोस्टर बैनर में खुद की हाथ जोड़े तस्वीर लगा दी। नाम विनोद देवी का, चेहरा रतन पटेल का। विनोद देवी जीत गईं। इसके बाद बधाई देने वाले भी धुरंधर। रतन पटेल की फोटो पर ही चेयरमैन साब लिखकर बधाई देना शुरू कर दिया। विनोद देवी को कोई श्रेय नहीं। पति देव चारों दिशाओं में बधाई लेते घूमे। उन्हीं के पोस्टर, उन्हीं के बैनर, उन्हीं के गुणगान। गांव में स्वागत सभा हुई तो विनोद देवी सिर पर पल्लू लेकर चुपचाप बैठी रहीं। माइक लेकर उनके पतिदेव भाषण झाड़ रहे थे। बोले- सारी जन समस्याओं की रिपोर्ट मुझे सोमवार तक मेरी टेबल पर चाहिए। मैं यह कर दूंगा, मैं वह कर दूंगा। देखा जाए तो विनोद देवी की जिम्मेदारी है कि मौका मिला है तो वे दायरे से निकलें और पतिदेव को याद दिलाएं कि अकेले अब वे ही पति नहीं, पत्नी भी सभापति है। 4. चलते-चलते… मंदिर में लाउड स्पीकर लगाकर हनुमान चालीसा का संगीतमय प्रसारण किया जा रहा था- सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना.. पूरा इलाका भक्तिमय था। इसी दौरान एक लड़का कुछ साथियों के साथ मंदिर में आया और पुजारी से बोला- शोर क्यों मचा रखा है? लाउड स्पीकर बंद करो। लड़के के ऐतराज के बावजूद हनुमान चालीसा जारी रही- भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावै.. पुजारी ने लड़के की बात को महत्व नहीं दिया। उन्होंने सोचा- त्रेता युग में ऋषि-मुनि संतजन हवन करते थे तो राक्षसों को पीड़ा होती थी। पुजारी-युवक संवाद और हनुमान चालीसा उसी तरह चलते रहे- संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा.. कुछ देर में बातचीत क्रमश: बहस, आरोप-प्रत्यारोप, वार-पलटवार में बदल गई। क्षणभर में युद्ध एकतरफा हो गयाा। लड़के ने पुजारी को गर्भगृह की जालियों के ऊपर से खींच लिया और मुक्के बरसा दिए। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। पुजारी के समर्थन में समाज जुट आया। थाने के सामने डेरा डाल दिया गया। पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की गई। इसके बाद नए सिरे से थाने के बाहर ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू हो गया- साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे.. इनपुट सहयोग- मुकेश सोनी (कोटा), नरेंद्र भारद्वाज (सवाई माधोपुर), निखिल सिंह (जयपुर) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
Leave a Reply